‘सराहे’ जाने की लालसा

यह बात उस समय की है जब मेरी छोटी बेटी दूसरी कक्षा में पढ़ती थी और लगभग सात वर्ष की थी। एक दिन उसकी क्लास टीचर ने अच्छा होमवर्क करने पर उसकी नोटबुक में ‘Very Good’ (वेरी गुड) लिख दिया। वह बहुत खुश होकर घर आयी और आते ही अपनी मम्मी को बताया कि देखो उसको आज होमवर्क में वेरी गुड मिला। जब तक उसने घर में एवं आस-पड़ोस में रहने वाले सबको नहीं बताया तब तक खाना भी नहीं खाया। यही नहीं शाम सात बजे तक मेरे आने का बेसब्री से इंतजार करती रही। जैसे ही मैंने घर के बाहर आकर स्कूटर रोका तो वह तुरन्त हाथों में नोटबुक लेकर दौड़कर गेट पर आयी और मुझे नोट बुक दिखाई। उस दिन उसकी प्रसन्नता का कोई ठिकाना नहीं था। जरा सोचिये एक सात साल की बच्ची अपनी तारीफ सुनकर इतनी खुश हो सकती है तो इससे भी ज्यादा खुशी बड़ों को होती है।

 

ध्यान रहें प्रत्येक व्यक्ति को अपनी तारीफ सुनना पसन्द है। विश्व के प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक विलियम जेम्स ने कहा है ‘हर मनुष्य के दिल में यह लालसा छुपी होती है कि उसे सराहा जाये।’

 

अत: किसी व्यक्ति की कोई भी बात, आदत आपको अच्छी लगती है, किसी व्यक्ति द्वारा किया गया कार्य आपको पसन्द आता है, तो दिल खोलकर उसकी तारीफ कीजिये, मुक्त कण्ठ से उसकी प्रशंसा कीजिये, उसके कार्य की सराहना कीजिये।

 

लेकिन ध्यान रहें प्रशंसा सच्ची होनी चाहिए। अपने स्वार्थ सिद्धि के लिए चापलूसीपूर्ण तारीफ न करें, सराहना निस्वार्थ होनी चाहिए।

 

चापलूसी व प्रशंसा में बहुत बड़ा अन्तर होता है। समझदार व्यक्ति चापलूसी व प्रशंसा में फर्क तुरन्त समझ लेता है। समझदार व्यक्ति के सामने चापलूसी सफल नहीं होती है। हालांकि नासमझ लोग चापलूसी को भी तारीफ समझ लेते हैं। ध्यान रहे चापलूसी का अर्थ है झूठी तारीफ। और मैं आपको सलाह दूँगा कि चापलूसी करने वालों यानि झूठी तारीफ करने वालों से दूर रहें, उनकी संगत से बचें। किसी महान विद्वान ने कहा है ‘अपने पर हमला करने वाले दुश्मनों से मत डरो, बल्कि उन दोस्तों से डरो, जो तुम्हारी चापलूसी करते हैं।’

 

दूसरे व्यक्तियों की अच्छी आदतों की, उनके अच्छे व्यवहार की, उनकी उपलब्धियों की, उनके अच्छे कार्यों की, उनके व्यक्तित्व के गुणों की, ईमानदारी से तारीफ करें, दिल खोलकर उनकी प्रशंसा करें, मुक्त कण्ठ से सराहना करें।

 

आपकी सच्ची तारीफ, प्रशंसा, सराहना उन व्यक्तियों को और अधिक सकारात्मक कार्य करने और अधिक उपलब्धियाँ हासिल करने हेतु प्रोत्साहन (Motivation) का कार्य करेगी। प्रशंसा दो तरीके से काम करती है। जब आप किसी की प्रशंसा करते हैं तो आप महसूस करेंगे कि आप दूसरे व्यक्ति को प्रोत्साहित कर रहे हैं तथा उस व्यक्ति का आत्म विश्वास बढ़ता है और जिस व्यक्ति की प्रशंसा की जा रही है वह प्रशंसा करने वाले की ओर आकर्षित होता है और उसके मन में प्रशंसा करने वाले व्यक्ति के प्रति सम्मान जाग्रत होता है।

 

प्रशंसा सुनना हर व्यक्ति पसन्द करता है। प्रशंसा सुनने पर व्यक्ति का आत्मविश्वास बढ़ता है। ध्यान रखें सभी व्यक्ति प्रशंसा और सम्मान के भूखें है और इन्हें पाने के लिए कुछ भी करने को तत्पर हो जाते हैं। दूसरे व्यक्त्यिों से हुई गलतियों की आलोचना करने के बजाय उनमें हुए थोड़े से सुधार की भी प्रशंसा कीजिए क्योंकि जब आलोचना कम एवं प्रशंसा अधिक होती है तो लोगों को अच्छा काम करने की प्रेरणा मिलती है। अत: हमें किसी की आलोचना के बजाय प्रशंसा करना सीखना चाहिए। व्यक्ति में हुए थोड़े से सुधार की भी सराहना करना चाहिए। इससे सामने वाले व्यक्ति को सुधरने हेतु प्रोत्साहन और प्रेरणा मिलती है।